छोटा शेर जिसने दहाड़ना सीखा (छोटा, साउंड-फ्रेंडली वर्ज़न)
लीओ शेर एक हरी पहाड़ी के पास रहता था।
वह दौड़ सकता था। वह कूद सकता था।
पर उसकी दहाड़ धीमी थी। “ह्ह… ह्ह…”
“चलो अभ्यास करें,” लीला तोते ने कहा।
“एक गहरी साँस लो। ‘आाा’ कहो। अब ‘र्रर’।”
लीओ ने कोशिश की। “आाा… र्रर…” फिर भी धीमा।
उन्होंने नदी सुनी: “शश्श… शश्श।”
उन्होंने पत्ते सुने: “फस्स… फस्स।”
“तेज़ आवाज़ के लिए गहरी साँस चाहिए,” लीला ने कहा।
लीओ सीधा खड़ा हुआ। उसने गहरी साँस ली।
“र्र्र्र्रोोो!” उसकी दहाड़ तेज़ और साफ़ थी।
सब जानवरों ने सुना। लीओ को गर्व हुआ।
हर दिन लीओ अभ्यास करता: “र्रर… आाा… ओोो!”
उसके शब्द साफ़ हुए। उसकी आवाज़ तेज़ हुई।
छोटा शेर अब बड़ी, बहादुर दहाड़ में बोलता था।
